Tuesday, April 28, 2009
लौट के बुद्धू ब्लॉग्गिंग पर आए
हमने सोचा जुड़ने मई क्या बुराई है ,वैसे भी बदलाव तोह प्रकृति का नियम है।
जुड़ गए ऑरकुट मैं हमने भी लिखा अपने बारे मैं और फ़िर दोस्त बनाये और शुरू हुआ स्क्रेप्पिंग का दौर.सब इधर का माल इधर करते है ,कोई अपने मन से अभियक्त नही करता.लगा कि मौलिकता का जमाना ही ख़तम हो गया.
बड़ा बकवास है जी यह तो "कॉपी पेस्ट " कि राजनीती है।
हद तोह तब हो गई जब हमने कई प्रोफाइल के अन्दर अपने और साथी ब्लोग्गरों कि लिखी रचनाए देखि।
इसलिए भइया हम कहते है ब्लॉग्गिंग बेस्ट है।क्योकि सब यही से निकलता है.टिपण्णी लिखते लिखते दोस्त बन जाते है. अनजान लोगो के मौलिक विचारो को जान लेते है।
तो कभी हास्य रस या श्रृंगार वीर आदि रसो का आनद लेते है।
तोह फ़िर हम को ऑरकुट कि क्या जरूरत ऑरकुट को हमारी है.
Sunday, April 5, 2009
गूगल की हिन्दी सज्जेस्ट सेवा
गूगल लैब का लिंक ==> गूगल की भारतीय लैब

इन्ही सेवाओ में हिन्दी "suggest" सेवा काफी रोचक लगी है।
गूगल की हिन्दी सज्जेस्ट सेवा आपकी "सर्च " को हिन्दी में बदलती है साथ ही सलाह भी देती है।
इस सेवा का लिंक==> गूगल की हिन्दी सज्जेस्ट सेवा

यह सेवा इसलिए बहुत महत्वपूर्ण है क्योंकि इसके परिणामो (सर्च results) में भी आप हिन्दी पाएंगे ।
यह बात ध्यान देने योग्य है की , इसके परिणाम रोमन भाषा में लिखी हिन्दी के परिणामो से भिन्न है ।
यह हम जैसे हिन्दी प्रेमियों के लिए वरदान है।इसकी सहायता से हिन्दी सामग्री (समाचार ,ब्लॉग ) आसानी से खोजे जा सकते है।
तो अब गूगल के साथ हिन्दी सर्च भी हो जाए!!
Sunday, February 8, 2009
आपकी गर्लफ्रेंड क्यो नही है ??
हम भोले भाले भले चंगे नौजवान है. औरों की तरह हमारा गुजरा भी दोस्तों की संगती
मे होता है।रोज मीटिंग "इंडिया गेट "(जयपुर) की चाये की थडी पर होती है
.!!! व्यर्थ की चर्चाये , भविष्य की "planning" ,गाना बजाना, तर्क - वितर्क या
हँसी मज़ाक करते करते शाम बीत जाती है;और जब से सतीश जी का कैमरे वाला मोबाइल आया
है फोटो शूट भी हो जाती है।
(फोटो:pushpendra paliwal(सतीश sir के कैमरे से मेरी तस्वीर) )

(फोटो:- सतीश भइया camare के sath )!!!

(फोटो:-चाये की थडी से; पीछे बाए से :sujit ,pushpendra(me) ,saurav, ankit, amit,anmole
आगे बाए से :vijay,anup,gaurav,pradeep)
हम बोले "हे प्रभु !
आजकल हमारे प्रिय मित्रो को क्या हो गया है?
वो मीटिंग मे नही आ रहे है?
क्या वो सुधर गए है?
क्या उनका लुक्कागिरी से विश्वास उठ गया है?
क्या वोः अब आदर्श छात्रों सा जीवन व्यतीत कर रहे है?"
हम को इतना चिंता मे पाकर हमारे वरिष्ठ ब्रजेश जी बोले "हे बालक!!
तू मित्रो की उपस्थिति को कम पाकर शोक मत कर ।
कोई सुधरा नही है।
युवावस्था मे कोई लुक्कागिरी को नही छोड़ सकता, ये ही शाश्वत सत्य है।
ये सब "velentine डे " का चक्कर है ।
सब अपनी अपनी गर्लफ्रेंड 'set' करने के लिए फोन पर लगे हुए होंगे ."
क्या तुम्हारी कोई गर्लफ्रेंड नही है ??

(फोटो :-हमारे senior brajesh sir)
इस प्रश्न को सुनकर हम मन ही मन मुस्कुराए ',
हमारी मुस्कराहट का एक कारण था,
कारण क्या वह तो "चाँद" और "फिजा" के बीच का बहुचर्चित प्रकरण था,
हम को पता था की इस चक्कर(लड़की के चक्कर का ) का अंत या तो सुखद होगा या दुखद होगा,
हमारे सीनियर की माने तो दुखद ही होगा,
प्यार मिला तो फ़ोन रिचार्ज कराने पडेंगे,
बिल देने पडेंगे,
और प्यार नही मिला तो मजनू को जूते भी खाने पडेंगे,
दुःख मे बुरी तरह से टूट जाएगा
और अपना गम भुलाने,
और लुकगिरी करने ,
यही थडी पर आयेगा .
जब कहानी यही ख़त्म होनी है!!
तोह हम यही सही!!
इस उत्तर को सुन भईया मुस्कुराये लगा की मैने उनकी कहानी बोले दी थी।
सब शांत हो गए ,चाये खत्म की और चल दिए । जाते जाते ये पंक्तियाँ सभी
युवा कुवारे(single) भाइयो के लिए।
हम पंछी उन्मुक्त गगन के
पिंजर बंद न गा पाएंगे
कनक डोलियों से टकराकर
किंचित पंख टूट जायेंगे
हम बहता जल पीने वाले
मर जायेंगे भूखे प्यासे
कही भली है कटुक निम्बोरी
कनक कटोरी की मैदा से
!!
Saturday, January 31, 2009
भगवान के कान कहाँ है !!
आज सुबह जब "त्रस्त होकर"उठा तोह मन मैं एक विचार आया की आखिर भगवान के कान कहाँ है?
यह प्रश्न न केवल महत्वपूर्ण है बल्कि विचारनीय है क्योंकि हम कभी न कभी लाउड स्पीकरों से परेशान रहे है।
अब वो चाहे हो :-
सुबह की अजान
दिन की पूजा
शाम की आरती
या रात मे जगराता
(और भी ............)
सब मैं एक समानता है==>आसमान की और मुह किए लाउड स्पीकर !
किस को सुना रहे हो भाई! भगवान को ;
"क्या भगवान के कान आसमान में है!! "
अरे भाई भगवान तोह दिल में बसते है,भगवान तोह हर एक में है !
उन में भी जो एन लाउड स्पीकरों से परेशान हो रहे है ।
लेकिन क्यो बोले क्योंकि हम भी तोः कल की पूजा में ऐसा करने वाले है!
!!बसंत पंचमी की बधाई !!
जय माँ सरस्वती
Thursday, January 29, 2009
न्यूज़ चैनल खतरा ऐ जान
क्या आपका कोई दुश्मन है?
कोई आपको परेशान कर रहा है?
ज्यादा घबराए नही आप केवल भाईसाहब को न्यूज़ चैनल के सामने बैठा दीजिये .बाकि काम अपने आप हो जाएगा।
अगले दिन से वो किसी चिंतामग्न नजर आएंगे ।
देखिया इस बीमारी ने क्या क्या गुल खिलाये है........
*मध्यप्रदेश की लड़की ने केवल इस लिए आत्महत्या की क्योंकि खबरिया चैनल ने उसे विश्वास दिला दिया था की महाप्रलय आने वाला है।
*खबरिया की करतूत ने "ग्रेग चैपल" साहब की वाट लगा दी
अजी साहब तो देर किस बात की नुस्का दिया है तोह आजमाऐ
लेकिन ध्यान रहे खबरिया से बच के
हम चले न्यूज़ देखने!!!


