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Sunday, February 6, 2011

कागजो का ढेर

सरकारी कार्यालयों को एक लाइन मे परिभाषित इन्ही शब्दों से किया जा सकता है .
किसी कारण से सरकारी आफिस गया जरा आफिस मे बाबू नहीं था . पूछा तो पता चला की साहब पेशी पर गए है थोड़ी देर मे जायेंगे, वही कार्यालय मे घूमने लगा चारो तरफ कागजो का ढेर लगा था, तीन कमरों मे केवल कागज थे .बाहर भी केवल कागज थे . मै कागजो का ढेर देख के स्तब्ध था।ऑफिस मे पड़ा हर कागज का ढेर मुझ पर धौस जमा रहा था . हम कागजो के गुलाम है . जरा अपने चारो तरफ देखे कैसे हम कागजो मे फसे है .identity कार्ड अपनी प्रमाणिकता साबित करने के लिए,प्रमाण पत्र मर्यादा बढाने के लिए , पैसो के नोट धन के रूप मे और अगर विवाद होती है तो मुक़दमे भी कागजो के सहारे चलते है।
सोच ही रहा था की बाबू गया,बोला कागज दिखाओ ;कागजो मे गलती है , ऐसे ही जमा करोगे तो वहां जायेंगे ,उसने कागजो के ढेर की और इशारा किया .
मै चुपचाप बाहर निकला ,समझ नहीं रहा था,क्योंकि कागज़ तो पूरे थे.सरकारी ऑफिस मै चपरासी आप का सबसे अच्छा मार्ग दर्शक होता है . उससे पुछा तो पता चला बाबू को पैसा चाहिए . अपनी फाइल को कागज के ढेर से बचाने मे भी कागजो ने ही साथ दिया . किसी तरह फाइल जमा करी और घर लौट आया .
विचार करने लगा.कागजो की ही माया है.पिताजी ने गुमसुम देख पूछ लियामैसे सारा मामला बताया तो हसने लगेबोले अभी से घबरा गए ,अभी तो कितने और ढेर देखने है
जाते जाते बोले की टेबल पर कागजो का ढेर हो रहा है वहां से हटा देना

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