प्याज की गणित

भूमिका
प्याज की कीमत समाचारों मे है।प्याज की कीमत कई मायनो मे महत्वपूर्ण है.प्याज को आम आदमी से सीधा जोड़कर देखा जा सकता है.इतिहास गवाह है ,की प्याज ने सरकारों को गिरा दिया है।

आज प्याज की कीमत 70 - 80 चल रही है ,जो की सामान्य मूल्य से 800% तक अधिक है.यह अचानक से नहीं हुआ है.इसके पीछे वायदा कारोबार भी एक बड़ा कारण है .

क्या है यह वायदा कारोबार
वायदा कारोबार शेयर बाज़ार की तरह है.यहाँ प्याज(तथा अन्य उत्पाद जैसे दाल ....) की कीमत पर सट्टा लगाया जाता है, और मुनाफे और हर सट्टे पर सरकार को भी फीस भी मिलाती है।
बाजार मे प्याज की भविष्य की कीमतों का अंदाजा लगाया जाता है .जैसी अगर बारिश कम हुई इसलिए उत्पादन कम होगा और भविष्य मे कीमत बढ़ेगी ।

वायदा कारोबार का नुकसान
देखने मे तो सब सही लगता है ,लेकिन ऐसा नहीं है । वायदा कारोबार वाणिज्य का एक जटिल विषय है .
कोई भी निवेशक अगर पैसा लगाता है, तो केवल मुनाफे के लिए !
कई बार भण्डारण करके या अन्य बहुत तरीको से कीमतों को बढाया जाता है, ताकि इस से मुनाफा हो सके ।
इसका एक उदाहरण चीनी की कीमते भी है ।

वायदा और सरकार
कालाबाजारी और कीमतों के साथ खेल पहले भी गैर क़ानूनी रूप से होता था , लेकिन वाजपेयी सरकार के मंत्री शरद यादव ने कानून बना कर इसको वायदा बाज़ार के रूप मे कानूनी बना दिया।
क्योंकि सरकार को इस से फायदा होता है इसलिए सरकार इस को नहीं रोकती है ।

आम आदमी के साथ मजाक
सरकार 35 मे प्याज बेचने का वादा कर रही है , जो की अभी भी 350% अधिक कीमत है.
और हम ये सोचने को मजबूर है की सरकार सस्ते मे बेच रही है,जबकि ऐसा नहीं है .सरकार इस मे भी बड़ा मुनाफा कम रही है ।

किसान को कोई फायदा नहीं है
इस पुरे किस्से की सबसे बुरी बात है ,की किसान को आज भी वोह ही कीमत मिल रही है.इस बात से अंदाजा लगाया जा सकता है की कीमत कौन बड़ा रहा है.

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